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जंतर-मंतर में UGC के नए नियमों के समर्थन में जुटा जनसमूह, चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी में उठी शिक्षा में समानता की मांग

जंतर-मंतर में UGC के नए नियमों के समर्थन में जुटा जनसमूह, चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी में उठी शिक्षा में समानता की मांग

नई दिल्ली, जंतर-मंतर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अधिसूचित नए नियमों के समर्थन में आज राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। इस समर्थन प्रदर्शन में भीम आर्मी, एससी, एसटी, ओबीसी समाज के प्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल रहे। कार्यक्रम में भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय चंद्रशेखर आजाद की उपस्थिति ने कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह भर दिया।

सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा केवल विशेष वर्गों तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुँचे, यह सुनिश्चित करना सरकार और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है। प्रदर्शनकारियों ने UGC के नए नियमों को सामाजिक न्याय की दिशा में एक आवश्यक कदम बताया।

प्रमुख मांगें रहीं केंद्र में

जंतर-मंतर पर आयोजित इस समर्थन कार्यक्रम में प्रदर्शनकारियों ने कई अहम मांगें रखीं—

UGC के नए नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

शिक्षण संस्थानों में जाति, वर्ग और क्षेत्र के आधार पर होने वाला भेदभाव बंद किया जाए।

इक्विटी रेगुलेशन (Equity Regulation) को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए UGC के रेगुलेशन को मजबूती दी जाए।

शिक्षा में समानता को मौलिक अधिकार की तरह लागू किया जाए।

एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव तत्काल रोका जाए।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि आरक्षण केवल जाति के आधार पर ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय असमानताओं को ध्यान में रखते हुए भी मिलना चाहिए, ताकि दूरस्थ और वंचित इलाकों के छात्रों को भी बराबर अवसर मिल सकें।

चंद्रशेखर आजाद का संबोधन

अपने संबोधन में चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि शिक्षा में समान अवसर ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक वंचित समाज के बच्चों को बराबरी का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक न्याय अधूरा रहेगा। उन्होंने युवाओं से संविधान के मूल्यों—समानता, न्याय और बंधुत्व—को मजबूत करने का आह्वान किया।

सामाजिक न्याय के नारों से गूंजा जंतर-मंतर

पूरे कार्यक्रम के दौरान मैदान “जय भीम, जय मूलनिवासी, जय संविधान, जय भारत, जय सतनाम, जय सेवा, जय विज्ञान, जय मंडल” जैसे नारों से गूंजता रहा। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और प्रतिभागियों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी।

कार्यक्रम में शामिल संगठनों का कहना है कि यदि शिक्षा में समानता सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में और व्यापक स्तर पर आंदोलन किए जाएंगे। यह आयोजन सामाजिक न्याय और शैक्षणिक समानता की दिशा में चल रही बहस का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

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