झालरौंदा में नई पत्थर खदान खोलने का ग्रामीणों ने किया विरोध, जनहित में अनुमति निरस्त करने की मांग
जांजगीर-चांपा /शक्ति। ग्राम झालरौंदा में प्रस्तावित नई पत्थर खदान को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में नई खदान खोलने का कड़ा विरोध करते हुए प्रशासन से इसकी अनुमति तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

झालरौंदा में नई पत्थर खदान खोलने का ग्रामीणों ने किया विरोध, जनहित में अनुमति निरस्त करने की मांग
जांजगीर-चांपा /शक्ति। ग्राम झालरौंदा में प्रस्तावित नई पत्थर खदान को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में नई खदान खोलने का कड़ा विरोध करते हुए प्रशासन से इसकी अनुमति तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले से ही दो पत्थर खदानें संचालित हैं, जिनके कारण धूल, प्रदूषण, शोर-शराबा तथा भारी वाहनों के आवागमन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एक और खदान शुरू होने से ग्रामीणों की परेशानियां और बढ़ जाएंगी तथा पर्यावरण एवं जनजीवन पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत आदिले ने बताया कि वर्तमान में संचालित खदानों का असर गांव के पर्यावरण, खेती-किसानी और लोगों के स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि नई खदान की अनुमति देना ग्रामीणों के हितों के विपरीत होगा और इससे क्षेत्र में पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित खदान की अनुमति को निरस्त किया जाए तथा पहले से संचालित खदानों के प्रभावों का निष्पक्ष मूल्यांकन कराया जाए। उनका कहना है कि विकास कार्यों का विरोध नहीं किया जा रहा है, बल्कि गांव के पर्यावरण, स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा के लिए यह आवाज उठाई जा रही है।
हेमंत आदिले ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रामीणों की मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामवासी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गांव और क्षेत्र के हित में उचित निर्णय लेने की अपील की है।



