संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन, विधेयक के प्रावधानों पर उठे सवाल
जांजगीर-चांपा जिले से एक अहम खबर सामने आई है, जहां चांपा मसीही समाज संगठन ने छत्तीसगढ़ धर्मांतरण विधेयक 2026 के कुछ प्रावधानों को लेकर विरोध दर्ज कराया है। संगठन द्वारा राज्यपाल के नाम एक संवैधानिक ज्ञापन सौंपते हुए विधेयक को वापस लेने या पुनर्विचार के लिए भेजने की मांग की गई है।

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संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन, विधेयक के प्रावधानों पर उठे सवाल
📍 रिपोर्ट: जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़
जांजगीर-चांपा जिले से एक अहम खबर सामने आई है, जहां चांपा मसीही समाज संगठन ने छत्तीसगढ़ धर्मांतरण विधेयक 2026 के कुछ प्रावधानों को लेकर विरोध दर्ज कराया है। संगठन द्वारा राज्यपाल के नाम एक संवैधानिक ज्ञापन सौंपते हुए विधेयक को वापस लेने या पुनर्विचार के लिए भेजने की मांग की गई है।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित विधेयक के कुछ प्रावधान नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता, निजता के अधिकार और अंतरात्मा की आज़ादी जैसे मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। ज्ञापन में विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई गई है कि धर्म परिवर्तन से पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना और सार्वजनिक घोषणा करना, व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप के रूप में देखा जा सकता है।
मसीही समाज ने स्पष्ट किया कि वे जबरन या प्रलोभन देकर किए जाने वाले धर्म परिवर्तन के खिलाफ हैं, लेकिन विधेयक में शामिल कुछ प्रावधान अत्यधिक कठोर और अस्पष्ट हैं। इससे आम नागरिकों पर अनावश्यक दबाव बनने की आशंका जताई गई है।
ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारतीय संविधान हर नागरिक को अपनी आस्था चुनने, मानने और उसका प्रचार करने का अधिकार देता है। साथ ही ‘राइट टू प्राइवेसी’ को भी मौलिक अधिकार के रूप में उल्लेखित किया गया है।
संगठन ने यह भी आशंका जताई है कि यदि इस विधेयक को वर्तमान स्वरूप में लागू किया जाता है, तो समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ सकता है, जो सामाजिक समरसता के लिए उचित नहीं होगा।
🔹 मुख्य मांगें:
• विधेयक को वापस लिया जाए या पुनर्विचार के लिए भेजा जाए
• सभी धार्मिक और सामाजिक संगठनों के साथ व्यापक चर्चा की जाए
• ऐसे प्रावधान हटाए जाएं जो मौलिक अधिकारों को प्रभावित करते हैं
🔚 निष्कर्ष:
चांपा मसीही समाज ने उम्मीद जताई है कि राज्यपाल इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाते हुए संविधान के मूल्यों के अनुरूप उचित निर्णय लेंगे।



