गोंडवाना गणतंत्र पार्टी शक्ति जिला इकाई का 30 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना जारी, कलेक्टर घेराव की चेतावनी

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी शक्ति जिला इकाई का 30 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना जारी, कलेक्टर घेराव की चेतावनी

शक्ति। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जिला इकाई शक्ति द्वारा अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर दिनांक 3 जनवरी 2026 से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। आज 30 जनवरी 2026 को धरने को लगभग 30 दिन पूर्ण हो चुके हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारियों का आरोप है कि शक्ति क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शासकीय भूमि की अवैध खरीदी-बिक्री की जा रही है, जिसमें भूमाफियाओं के साथ-साथ कुछ शासकीय अधिकारी एवं कर्मचारी भी संलिप्त हैं। पार्टी द्वारा इस संबंध में पूर्व में आवेदन देकर जांच एवं दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण पार्टी को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
धरने के दौरान पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक भूमाफियाओं एवं शासकीय जमीन की अवैध खरीदी-बिक्री में संलग्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक यह धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी घोषणा की गई है कि आगामी दिनों में आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दादा राधेश्याम कोकाड़िया जी एवं प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष भैया सूरज यादव जी ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे प्रदेश के पार्टी पदाधिकारी शक्ति जिला पहुंचेंगे। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।
इस आंदोलन में जिला युवा मोर्चा शक्ति के जिला अध्यक्ष कीर्तन सिंह मरावी, जिला सचिव भानू प्रताप चौहान, शेखर गोंड, समुन्द्र सिदार, लाभो नेताम, दिलचंद, देवेंद्र महंत, रवि सिदार, मनमोहन एवं चंद्र देव सहित अनेक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से शामिल हैं। नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन जनता के हक और शासकीय संपत्ति की रक्षा के लिए किया जा रहा है।
पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में लगभग 100000 की संख्या में लोगों की सहभागिता रहने की संभावना है। यदि इस दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है तो उसकी जिम्मेदारी पूर्ण रूप से शासन-प्रशासन की होगी।
फिलहाल धरना स्थल पर शांति बनी हुई है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी को लेकर आंदोलनकारियों में रोष बढ़ता जा रहा है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन कब तक इस गंभीर मामले में संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाता है।




