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धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के विरोध में सौंपा गया संयुक्त संवैधानिक ज्ञापन, कांग्रेस का भी मिला समर्थन जांजगीर-चांपा जिले में विभिन्न मसीही समाज, चर्च संगठनों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तावित छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के विरोध में महामहिम राज्यपाल महोदय के नाम एक संयुक्त संवैधानिक ज्ञापन सौंपा गया

सीजी पंचायत न्यूज़ 24/7 | विशेष समाचार

जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़), 28 मार्च 2026


✊ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के विरोध में सौंपा गया संयुक्त संवैधानिक ज्ञापन, कांग्रेस का भी मिला समर्थन
जांजगीर-चांपा जिले में विभिन्न मसीही समाज, चर्च संगठनों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तावित छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के विरोध में महामहिम राज्यपाल महोदय के नाम एक संयुक्त संवैधानिक ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन संयुक्त मसीही समाज जिला जांजगीर-चांपा एवं “जांजगीर चांपा चर्चेस वेलफेयर सोसायटी” के नेतृत्व में प्रस्तुत किया गया।

📄 ज्ञापन में बताया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, आचरण करने एवं प्रचार करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। साथ ही निजता (Privacy) और अंतरात्मा की स्वतंत्रता भी मौलिक अधिकार हैं। ऐसे में प्रस्तावित विधेयक के कुछ प्रावधान इन अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।


⚖️ विधेयक के प्रावधानों पर उठी आपत्ति
ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चिंता जताई गई—
धर्म परिवर्तन से पूर्व जिला मजिस्ट्रेट को अनिवार्य सूचना देना निजता के अधिकार का उल्लंघन माना गया।
सार्वजनिक सूचना एवं तीसरे पक्ष की आपत्ति की प्रक्रिया से सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई गई।
कठोर दंड (कारावास एवं जुर्माना) के दुरुपयोग की संभावना व्यक्त की गई।
डिजिटल माध्यम से धार्मिक प्रचार-प्रसार को संदेह के दायरे में लाने पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रभावित होने की बात कही गई।
📌 ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि धार्मिक आस्था व्यक्ति का निजी विषय है और इसमें अनावश्यक हस्तक्षेप संविधान की मूल भावना के विपरीत है।
🤝 मोनोनाइट चर्च ग्राउंड में रैली और धरना प्रदर्शन
इस मुद्दे को लेकर जिले में व्यापक विरोध भी देखने को मिला। मोनोनाइट चर्च ग्राउंड में आयोजित रैली एवं धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस पार्टी ने भी अपना समर्थन देते हुए प्रदर्शन में भाग लिया।
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में शामिल होकर प्रस्तावित विधेयक को “काला कानून” बताते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।
📢 सरकार से प्रमुख मांगें
प्रस्तावित विधेयक को वर्तमान स्वरूप में पारित करने की प्रक्रिया को तत्काल स्थगित किया जाए।
विधेयक को पुनः व्यापक विचार-विमर्श हेतु विधि विशेषज्ञों, मानवाधिकार संगठनों एवं विभिन्न धार्मिक समुदायों के पास भेजा जाए।
मौलिक अधिकारों को प्रभावित करने वाले प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किया जाए।
कानून को संविधान एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप बनाया जाए।
✍️ प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि महामहिम राज्यपाल महोदय संवैधानिक मर्यादा, सामाजिक समरसता एवं नागरिकों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेंगे। ज्ञापन की प्रति महामहिम राष्ट्रपति को भी प्रेषित की गई है।
रिपोर्ट: सीजी पंचायत न्यूज़ 24/7

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