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बड़ी खबर: सक्ती (छत्तीसगढ़)पिरदा में राखड़ माफियाओं के हौसले बुलंद; छोटी सड़कों और नहरों पर दौड़ रहे ओवरलोड हाइवा, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

पिरदा में राखड़ माफियाओं के हौसले बुलंद; छोटी सड़कों और नहरों पर दौड़ रहे ओवरलोड हाइवा, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

**सक्ती, छत्तीसगढ़:**

सक्ती जिले के पिरदा क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ राखड़ (फ्लाई एश) परिवहन में लगे भारी और ओवरलोड वाहनों ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। पिरदा की संकरी ग्रामीण सड़कों और नहर की पटरियों पर दिन-रात राखड़ से लदे हाइवा वाहन तेजी से दौड़ रहे हैं। इस स्थिति को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं, जिससे राखड़ माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं।

मुख्य बिंदु: समस्या की जमीनी हकीकत

1.सड़कों की दुर्दशा:दिन-रात चल रही भारी और ओवरलोड गाड़ियों के कारण गांव की आंतरिक और कमजोर सड़कें पूरी तरह खराब हो रही हैं।हा

2. हादसे का साया : संकरी सड़कों पर तेज रफ्तार हाइवा वाहनों के चलने से हर वक्त बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है, जिससे ग्रामीणों और स्कूली बच्चों में डर का माहौल है।

* **तीन बार रोका चक्काजाम:** प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर पिरदा के किसान और ग्रामीण अब तक **3 बार राखड़ गाड़ियों को रोककर** अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं।

* **रूट बदलने की मांग:** ग्रामीणों द्वारा पहले भी कई बार प्रशासन से मांग की जा चुकी है कि इन राखड़ गाड़ियों को ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्र से हटाकर किसी दूसरे वैकल्पिक रूट से ले जाया जाए।

> **”जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदारों ने मूंदी आंखें, राखड़ माफियाओं के हौसले बुलंद। दिन-रात चल रही भारी गाड़ियों से ग्रामीणों में बढ़ा बड़ा खतरा।”**

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### **प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपील**

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। राखड़ माफिया नियमों को ताक पर रखकर अपनी जेबें भर रहे हैं और गांव के पर्यावरण व बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

पिरदा के समस्त किसानों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से **तत्काल सख्त कार्रवाई** करने, ओवरलोड वाहनों पर जुर्माना लगाने और राखड़ परिवहन के लिए तुरंत नया रूट निर्धारित करने की पुरजोर अपील की है। यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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