✊ “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” के विरोध में राष्ट्रपति को ज्ञापन, अनुमति न देने की मांग
जांजगीर-चांपा जिले से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जहां भीम आर्मी भारत एकता मिशन की जिला इकाई द्वारा “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” के विरोध में देश की माननीय राष्ट्रपति महोदया को विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया गया है।

सीजी पंचायत न्यूज़ 24/7 | विशेष समाचार
जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़)
दिनांक: 07/04/2026
✊ “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” के विरोध में राष्ट्रपति को ज्ञापन, अनुमति न देने की मांग 

जांजगीर-चांपा जिले से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जहां भीम आर्मी भारत एकता मिशन की जिला इकाई द्वारा “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” के विरोध में देश की माननीय राष्ट्रपति महोदया को विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया गया है।
संगठन ने अपने ज्ञापन में इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए उस पर अनुमति न देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह प्रस्तावित कानून भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत है और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
ज्ञापन के अनुसार, यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धर्म की स्वतंत्रता, अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समानता एवं जीवन के अधिकार का हनन करता है।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि विधेयक में प्रयुक्त “प्रलोभन”, “बल” एवं “कपटपूर्ण साधन” जैसे शब्द अत्यंत अस्पष्ट हैं, जिससे सामाजिक सेवाएं—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, दान एवं मानवीय सहायता—भी गलत तरीके से धर्मांतरण के दायरे में आ सकती हैं। इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी और सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
इसके साथ ही, ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यह विधेयक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों—जैसे UDHR और ICCPR—के विपरीत है, जिनके प्रति भारत प्रतिबद्ध है।
महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस विषय से संबंधित मामला वर्तमान में Supreme Court of India में विचाराधीन है, जहां विभिन्न राज्यों के समान कानूनों को चुनौती दी गई है। ऐसे में इस विधेयक को अनुमति देना न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध बताया गया है।
✊ संगठन की प्रमुख मांगें:
धर्मांतरण की परिभाषा स्पष्ट और पारदर्शी की जाए
“घर वापसी” को भी धर्मांतरण की श्रेणी में शामिल किया जाए
झूठी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान हो
सामाजिक एवं धार्मिक स्वतंत्रता के शांतिपूर्ण अभ्यास को संरक्षित किया जाए
अंत में, संगठन ने माननीय राष्ट्रपति महोदया से विनम्र अपील की है कि इस विधेयक की संवैधानिक समीक्षा करते हुए इसे अनुमति प्रदान न की जाए।
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